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Trivenis

  • 9 hours ago
  • 2 min read

By Shikhar Trivedi



किताब के आखिरी पन्ने में

मैंने उसे दबाए रखा है

मेरे शब्दों से उसकी महक आती है (1)


एक पुरानी घड़ी है जो

कलाई पे बांधी थी उसने

उसके जाने से सुईयां रुकी हुई हैं (2)


मेरे मकान की फ़र्श अब ढहने लगी है

छत से अक्सर पानी टपकता है

सफ़ेद होने लगे हैं पिताजी के बाल अब (3)


दिल का संदूक खाली है

ज़ंग लगने लगा है ताले पर

इक अरसा हुआ यार से मिले हुए (4)


माथे पे उसके पसीने की बूंदें

है हाथों के बल वो चल रही

प्यार हमारा एक नवजात शिशु है (5)


ग़म न कर यार, दुख सबको मिलता है

कुछ को सूखा, कुछ को गीला मिलता है

आनंद साहिल की लहरों सा है, वापिस आएगा (6)


टपक टपक कर चूती रही

मेरे होंठों से गिरती रही है

तेरी याद की कुल्फी पिघलने लगी है (7)


भर्राए फेफड़े धुंए से भर गए

आँखों में चिंगारियाँ चुभने लगी हैं

फिर किसी ठाकुर ने कोई बस्ती जलाई है (8)


अंधेरे के दांत बढ़ आए हैं

गुर्रा रहे हैं बादल मुझे देख

ये रात कोई जंगली जानवर है (9)


तेरे वादों पे था ऐतबार मुझे

खुली आँखों का वो मिराज था

रेगिस्तान में पानी कहाँ मिलता है (10)


रोना नहीं आता, अशआर लिखता है

गूंगा है मगर प्यार लिखता है

ये कलम मेरी आँख है, आंसू बहाता है (11)


आके मेरी क़ब्र पे उसने

रजनीगंधा की कलियाँ चढ़ाईं

जन्नत में आज बर्फबारी हुई है (12)


यादों की धूल उड़ी है

पुरानी हँसी आज फिर गूंजी

खानदानी कालीन आज झाड़ा गया (13)


अपनी आँखों के सागर में

उसके नाम की आज एक नाँव चलाई

उसे याद कर आज फिर मैं रोया हूँ (14)


उसके गीले होंठों ने चूमा मुझको

पसीने की बूंदों ने उसपे है इक माला बनाई

कल रात घास पर बहुत ओस गिरी है (15)

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